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बिहारियों के बारे में गलतफहमी

एक निश्चित क्षेत्र से लोगों को रूढ़िबद्ध करने की बात आती है, तो हम भारतीय बाकी सभी लोगों से एक पायदान ऊपर बने रहते हैं। दक्षिणी राज्य के लोग उत्तरी लोगों को, पश्चिमी राज्य के लोग पूर्वी लोगों को अलग नजरिए से देखते हैं।प्रत्येक राज्य के लोग दूसरे राज्य के लोगों के बारे में अलग अलग सोच रखते हैं। लोगों के समूह के बारे में अपना स्वयं का निश्चित दृष्टिकोण रखने में कुछ भी गलत नहीं है, लेकिन कुछ गलतफहमियों के आधार पर अपने विचार रखना पूरी तरह से गलत है।भारत के सभी बड़े राज्यों में से  बिहार राज्य को अक्सर भारत का सबसे अविकसित राज्य माना जाता है।अक्सर ये देखा गया है ,अमूमन प्रतेक राज्य में हम बिहारियों को लेकर कई धारणाएं बनी हुई है।यह विशेष रूप से नकारात्मक दृष्टिकोण है, ज्यादातर कुछ गलत धारणाओं पर आधारित है। बिहार और बिहार के लोग के बारे में ऐसा सोचना गलत है।  वे अब अविकसित या निरक्षर नहीं हैं। वे आगे बढ़ रहे हैं और सही दिशा में बढ़ रहे हैं। यहाँ बिहार और बिहारियों के बारे में सबसे आम गलतफहमियाँ हैं जिन्हें मैंने दूर करने की कोशिश की है। पहली धारणा तो ये है ,बिहार की आधिकारिक भाषा भोज...

मजदूर...!!!

टूटा- फूटा है घर इनका,ना दो वक़्त की रोटी है, बुरी हालातों से लड़ने वाले, इनकी इक्छाएं बहुत छोटी है|| इन्हें जमाने में फैली हुई नफरतों से क्या करना है, इन्हें तो बस मतलब है अपने पेट की तपिश मिटाने से|| तपती गर्मी में कमाने को दो पैसे ये घर से निकलते है , लेकिन साथ , हांथ-पांव में छाले लेकर वो घर को लौटते हैं|| अमीरी में इंसान अक्सर अपना सुकून खो कर सोता है, पर गरीब तो रूखी - सूखी भी खा कर सुकून से सोता है।। अक्सर फुटपाथ पर ही अख़बार बिछा कर सो जाते है, ये अमीरों की तरह  कभी नींद की गोली  नहीं खाते है।। सड़को में ये अलाव जला कर ही ऐसे रह जाते है, ख्वाबों का बिछोना ,आसमान की चादर बना  सो जाते है।। अपने खून-पसीने की खाते है और मिट्टी को सोना बनाते है, इसलिए तो  इनका देश के निर्माण में अमूल्य योगदान है|| सस्ते महंगे सभी काम परिवार के खातिर कर जाते  हैं, वो मजदूर है जो मलहम समझ घाव पर मिट्टी लगाते हैं।। देश की सफलता में सबसे बड़ा योगदान इनका होता है, श्रम करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, एक मजदूर होता है।।                   ...

मुस्कुराहट 😊

मुस्कुराते ही हमें रहना है, क्यूंकि मुस्कुराहट ज़िन्दगी को आसान बनाती है| मुश्किलों को तो आना ही है, पर मुश्किल वक़्त, हमारे मजबूत इरादे को आजमाती है|  माना कि दुख तो जीवन में आते है, पर ये क्यूं भूल जाते, हर घने अंधेरे के बाद रोशनी आती है|  ज़िन्दगी हमे बहुत कुछ सिखाती है, कभी ये हमें रुलाती है, तो कभी ये हमें हसाती है| मुस्कुराते ही हमें रहना है, क्यूंकि हमारी मुस्कुराहट ही ,अपनों का होंसला बढ़ाती  है| होंसला ना हारना ये तो सिर्फ ठोकरें  है, ठोकरें ही तो हमे गिर के संभालना सिखाती है|  जो हर हाल में खुश रहते हैं, ये ज़िन्दगी उनके कदमों में अपना सिर झुकाती है| मंजिल दूर भी है तो क्या, धीरे धीरे ही सही चल के अपने मौकाम में पहुंचते है| मुस्कुराते ही हमें रहना है, क्यूंकि मुस्कुराहट ज़िन्दगी को आसान बनाती है|                         ©✍️  #प्रीति प्रिया

मानवता अभी भी जिंदा है....!!

आज संपूर्ण विश्व को कोरोना नामक एक वायरस ने डारा रखा है| उसने यह अनुभव करा दिया है कि आज का मानव और उसके वैज्ञानिक अनुसंधान  भले ही विश्व के रहस्य को समझ ले और पृथ्वी से अंतरिक्ष तक के ग्रह एवं उपग्रहों तक पहुँचने का प्रयास कर लें, लेकिन पृथ्वी के एक  वायरस ने मानव के सम्पूर्ण विकास को चुनौती दे दी है और विकास का दम्भी मानव उसके सामने असहाय सा खड़ा है| आज कोरोना ने हमें आत्मचिंतन का अवसर दिया है|आज ना कल हम इस परिस्थिति से उभर ही आयंगे| परन्तु आज की परिस्थितियों ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हम किस ओर बढ़े जा रहे है|हम धीरे-धीरे परिवारभाव को विस्मृत कर रहे थे| वृद्ध मात- पिता वृद्धाश्रम की ओर जा रहे थे| एकाकी परिवार भाव ने मानव संबंधों पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया था|  परन्तु लॉकडाउन ने हमें अनुभव कराया है कि जहाँ संयुक्त परिवार हैं वहाँ एकाकीपन, अवसाद, बेचैनी अपेक्षाकृत कम है.|बच्चों को वृद्ध और वृद्धों को बच्चे आनंद दे रहे हैं|  आज छोटे-बड़े, स्त्री-पुरुष घर में एक साथ उठते-बैठते है, हंसते-बोलते हैं तो समय का ध्यान ही नही रहता| यह सुख तो दुर्लभ ही हो गया था|...