मानवता अभी भी जिंदा है....!!

आज संपूर्ण विश्व को कोरोना नामक एक वायरस ने डारा रखा है| उसने यह अनुभव करा दिया है कि आज का मानव और उसके वैज्ञानिक अनुसंधान  भले ही विश्व के रहस्य को समझ ले और पृथ्वी से अंतरिक्ष तक के ग्रह एवं उपग्रहों तक पहुँचने का प्रयास कर लें, लेकिन पृथ्वी के एक  वायरस ने मानव के सम्पूर्ण विकास को चुनौती दे दी है और विकास का दम्भी मानव उसके सामने असहाय सा खड़ा है|
आज कोरोना ने हमें आत्मचिंतन का अवसर दिया है|आज ना कल हम इस परिस्थिति से उभर ही आयंगे|
परन्तु आज की परिस्थितियों ने हमें सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हम किस ओर बढ़े जा रहे है|हम धीरे-धीरे परिवारभाव को विस्मृत कर रहे थे| वृद्ध मात- पिता वृद्धाश्रम की ओर जा रहे थे| एकाकी परिवार भाव ने मानव संबंधों पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया था| 
परन्तु लॉकडाउन ने हमें अनुभव कराया है कि जहाँ संयुक्त परिवार हैं वहाँ एकाकीपन, अवसाद, बेचैनी अपेक्षाकृत कम है.|बच्चों को वृद्ध और वृद्धों को बच्चे आनंद दे रहे हैं| 
आज छोटे-बड़े, स्त्री-पुरुष घर में एक साथ उठते-बैठते है, हंसते-बोलते हैं तो समय का ध्यान ही नही रहता| यह सुख तो दुर्लभ ही हो गया था| समाज में फिर से पड़ोसी के सुख-दुख की चिंता की जाने लगी है|परोपकार, दया, करूणा, आत्मीयता के भाव सहज जाग्रत हो रहे हैं|आज घर में भोजन का प्रकार बदल गया है ,विभिन्न रुचियों को संतुष्ट करने के स्थान पर वह जीवन यापन का साधन बन गया है|नए-नए फ़ैशन से आत्मप्रदर्शन की भावना शांत है|जीवन की बेचैन प्रतिस्पर्धा से व्यक्ति मुक्त अनुभव कर रहा है|
पहले जब भी खबरें देखती और पढ़ती थी तो बहुत आहत होता था,आखिर क्यूं हम इंसानियत भूलते जा रहे है|परन्तु इस कॉरोना काल में हमें एक छोटी सी किरण नजर आई है कि आज भी इंसानियत जिंदा है,आज भी लोग दूसरों की मदद के लिए परसपर तैयार रहते है|कुछ आसमजिक और चुनींदा लोगो की वजह से हम ये नहीं कह सकते ,कि  मानवता नहीं बची है इस दुनिया में|

इस संकट ने भारत के मूल स्वभाव के दर्शन कराए है| राष्ट्रीय भाव प्रबल हुए हैं|सक्षम व्यक्तियों ने असहाय ,निर्धन वर्ग के लिए भोजन , वस्त्र , चिकित्सा आदि की उदारतापूर्वक व्यवस्था की|
इस महामारी के माध्यम से विराट सत्ता और उसकी पराशक्ति प्रकृति ने हम सबको वास्तविक स्थिति का, मिथ्या अहंकार के परिणाम का और अपनी क्षमता का अनुभव कराया है.
 इस महामारी का शुभ संदेश यही है कि हम अपने  वास्तविक जीवन को पहचाने,हर पल कल की चिंता में स्वार्थी ना बने,आगे बढ़कर जरूरत मंदो की सहायता करे|
 मैं नहीं हम बन कर जीवन व्यपन करे|सामाजिक दूरी बनाए रखे और अपने कर्तवयों का निर्वाह करते रहे|स्वास्थ रहे , सुरक्षित रहे|


प्रीति प्रिया

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